Saturday, December 7, 2019 2:38 AM
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आजादी मार्च से डरी इमरान सरकार ने मौलाना से साधा संपर्क

इस्‍लामाबाद। आजादी मार्च से डरी पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार ने उलमा-ए-इस्लाम संगठन के प्रमुख फजलुर रहमान से सीधे दो-दो हाथ करने के बजाए बातचीत के जरिए प्रदर्शन को खत्‍म करने की कोशिशों में जुट गई है। इमरान सरकार ने फजलुर रहमान से संपर्क साधा है। वहीं 66 वर्षीय कट्टरपंथी मौलाना फजलुर ने कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान के इस्तीफे तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी अभी भी मौलाना की ओर से रखी गई मांगों पर अड़े हुए हैं और मंगलवार को पांचवें दिन भी धरना प्रदर्शन जारी है।

पाकिस्‍तानी अखबार द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार की ओर से वार्ताकारों की दो टीमों ने सोमवार को जेयूआई-एफ से संपर्क किया। पूर्व प्रधानमंत्री सुजात हुसैन की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार रात को मौलाना से मुलाकात की। इससे पहले रक्षा मंत्री परवेज खट्टक की अगुवाई में वार्ताकारों की एक टीम भी रहबर कमेटी के साथ बातचीत की। इस बातचीत में रहबर कमेटी की मांगों पर चर्चा हुई। वहीं विपक्षी दलों पीएमएल-एन और पीपीपी ने भी सरकार विरोधी इस रैली को समर्थन दिया है। हालांकि, यह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इमरान खान की सरकार किसी भी कीमत पर इस विरोध प्रदर्शन को खत्‍म कराना चाहती है। इसके लिए वह आड़े हाथ सख्‍त रवैया भी अख्तियार कर रही है। कल सोमवार को मौलाना फजलुर के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ लाहौर हाई कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई। इसमें सरकार के खिलाफ भड़काऊ और नफरत फैलाने वाला भाषण देने की शिकायत की गई है। उधर, 66 वर्षीय मौलाना झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्‍होंने कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान के इस्तीफे तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। हम आगे बढ़ते रहेंगे और कभी पीछे नहीं हटेंगे।

बता दें कि बीते शुक्रवार को आजादी मार्च के इस्लामाबाद पहुंचने पर मौलाना ने इमरान को इस्तीफा देने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया था जिसकी अवधि समाप्‍त हो गई है। उन्होंने कहा था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के धैर्य की परीक्षा लिए बिना ‘पाकिस्तान के गोर्बाचेव’ यानी इमरान खान को इस्तीफा देना ही होगा। वहीं जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने किसी भी कीमत पर सरकार को उखाड़ फेंकने की कसम खाई है। उन्‍होंने सरकार के बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इस सरकार ने लोगों का जीवन जहन्‍नुम बना दिया है।

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