Saturday, December 7, 2019 2:46 AM
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जेल में मोबाइल मिलने के मामले आ रहे सामने

हरिद्वार। जेल में मोबाइल चलाने वाले कैदियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्हें सिर्फ एक जेल से दूसरी जेल शिफ्ट कर दिया जाता है। जेल में मोबाइल कैसे पहुंचते हैं, किस के संरक्षण में चलते हैं और किन-किन लोगों की इसमें मिलीभगत रही है, पुलिस ने किसी भी मुकदमे में आज तक इसका खुलासा नहीं किया है। अगर जेल में मोबाइल पहुंचाने वाले परिजनों या अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती तो शायद जेल में मोबाइल चलाने पर किसी हद तक लगाम लगाई जा सकती थी।

उत्तराखंड की सबसे बड़ी जेल रोशनाबाद जिला कारागार में पिछले दो-तीन साल में कुल 40 मोबाइल मिल चुके हैं। हर बार जेल प्रशासन की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जाता है। अब आरोपित पहले से ही जेल में होते हैं, इसलिए पुलिस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर देती है। किसी भी मामले में पुलिस ने कैदी को रिमांड पर लेकर यह जानने की कोशिश नहीं की है कि जेल में अंदर मोबाइल पहुंचते कैसे हैं। इसमें किन-किन लोगों की मिलीभगत है, या किस तरह का दबाव रहता है। कार्रवाई के नाम पर हद से ज्यादा कैदियों को दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया जाता है।

पिछले दिनों कुख्यात संजीव उर्फ जीवा के शूटर शाहरुख पठान और मुजाहिद से मोबाइल मिलने पर साथ बंदी रक्षकों के साथ मारपीट के मामले में दोनों को प्रदेश की अन्य जेलों में भेज दिया गया। पर जेल के अंदर मोबाइल कैसे पहुंचते हैं, मोबाइल की बैट्री कैसे चार्ज की जाती है, किन-किन नंबरों पर बात होती है, इसका खुलासा पुलिस ने भी कभी नहीं किया है।

यह बात अलग है कि जेल में मोबाइल चलाने वाले कैदी सबसे ज्यादा सिरदर्द भी पुलिस के लिए बन रहे हैं। वर्ष 2018-19 में जेल में मोबाइल मिलने के मामले में करीब 14 मुकदमें सिडकुल थाने में दर्ज हुए। सभी मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। प्रभावी कार्रवाई और पर्दे के पीछे छिपे नाम उजागर नहीं होने के चलते जेल में मोबाइल मिलने के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं।

मोबाइल मिलने के मामले में अगले दिन भी तहरीर नहीं 

जिला कारागार में मोबाइल मिलने के मामले में अगले दिन भी जेल प्रशासन की ओर से कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई। हालांकि आइजी के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। मगर अब से पहले जितनी बार भी जेल में मोबाइल मिले हैं, सभी मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इस बार जेल प्रशासन मुकदमा दर्ज कराने के लिए भी तैयार नहीं है।

जिला कारागार रोशनाबाद में मोबाइल मिलने का सिलसिला कई साल से जारी है। कुख्यात और उनके गुर्गों के अलावा छोटे और मामूली अपराधों में जेल गए छुटभैये अपराधी भी जेल से कॉल और मैसेज करते हैं। कनखल के भाजपा नेता कृष्ण मुरारी शर्मा के बेटे राहुल शर्मा से 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का शक दुष्कर्म के मामले में जिला कारागार में बंद गौरव चंचल पर है।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि राहुल ने अपनी पत्नी मोनिका का सिम जेल में मंगाया। इस सिम को मोबाइल में डालकर राहुल शर्मा के मोबाइल पर रंगदारी के लिए कॉल की गई है। इस मामले में एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने आईजी जेल को पत्र लिखा था। आइजी जेल के निर्देश पर चले सघन तलाशी अभियान के दौरान पांच मोबाइल बरामद हुए हैं।

आइजी जेल पीवीके प्रसाद ने पूरे मामले पर जांच बैठा दी है। अलबत्ता जेल प्रशासन ने अपनी तरफ से कैदियों के खिलाफ पुलिस को दूसरे दिन भी तहरीर नहीं दी है। सिडकुल थानाध्यक्ष प्रशांत बहुगुणा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जेल में कैदियों से मोबाइल मिलने के संबंध में कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

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